श्वेता शर्मा

ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं के प्रति लगातार हो रहे दुर्व्यवहार ने ऑस्ट्रेलिया की संसद में मी टू अभियान छेड़ दिया है। ऑस्ट्रेलिया में पिछले कुछ समय से महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले सामने आने से अब लगातार ऐसी महिलाएं सामने आ रही हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की संसद में यौन शोषण या असहज माहौल का अनुभव किया हैै। हाल ही में एक महिला जिनका नाम जूलिया बैंक्स ने बयान दिया कि ऑस्ट्रेलिया की संसद महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित कार्यस्थल है। अपने कुछ अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया की पांच साल पहले जब वो लॉ और बिजनेस के सफल करियर के बाद जब ऑस्ट्रेलियाई पार्लियामेंट पहुंची तो उन्हें लगा जैसे की वो 80 के दशक में आ गई हैं। ऐसा माहौल जहाँ शराब का आजादी से उपभोग होता है उन्होंने खुद वहां के पुरुष सांसदों में शराब की गंध को अनुभव किया है।

जूलिया बैंक्स के अनुसार ऑस्ट्रेलिआई संसद में पुरुष सदस्य महिलाओं को कुछ खास नहीं समझते। यहाँ तक की वहां के वातावरण में उनके लिए महिलाएं जैसे कोई खेलने का सामान हो, बैंक्स ने एक वाक्या साझा करते हुए बताया कि एक बार जब एक सांसद ने एक नई महिला इंटर्न से परिचय उसकी पीठ पर हाथ रगड़ते हुए कराया। बैंक्स ने कहा कि उसने और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। मुझे यकीन था कि ये उसका एक अशाब्दिक संकेत था कि ”कृपया कुछ ना कहें , मैं अपनी नौकरी खो दूंगी।”

आगे जूलिया बैंक्स ने कहा कि ”ये देश का सबसे असुरक्षित कार्यस्थल है।” ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की सरकार अब एक ऐतिहासिक बैकलैश का सामना कर रही है। एक के बाद एक हो रहे स्कैंडल्स ने उनके मतदान की संख्यां को भी कम करना शुरू कर दिया है। देश की प्रत्येक राजनीतिक पार्टी की महिला सदस्यों का यहीं कहना है कि वो वर्षों से अपना काम करते हुए निराश हुई हैं। उन्हें हमेशा अपमान, टालमटोल का सामना करना पड़़ा। वे नजरअंदाज और बाधित की गई और जब कभी उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें जवाब में हमलों का सामना करना पड़ा।

लेबर पार्टी की एक महिला नेता तान्या प्लीबसर्क का कहना है की इन सब से उन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा और आघात का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा ष्जब एक बार लोग अपनी कहानी सुनाने लगते हैं, इसे रोकना मुश्किल होता है। 90 के दशक से जेंडर और ऑस्ट्रेलियाई राजनीति का अध्ययन करने वाले नई साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के एक राजनितिक वैज्ञानिक लुइस चैपल ने कहा वे इसे नहीं देख सकते और उन्होंने इसे संचनात्मक दृष्टि से नहीं देखा है।

जूलिया बैंक्स जिन्होंने 2019 में संसद छोड़ दी थी वो अब अपने पूर्वाग्रह के बारे में एक किताब पूरी कर रही हैं। उन्होंने कहा की उन्हें भी अपने पहले फंडरैसर्स में अपमान का सामना करना पड़ा था जब उन्होंने पाया की उनका नाम तो वक्ताओं की सूची में था ही नहीं वहां सभी पुरुष थे।

इसी साल सामने आये है ऑस्ट्रेलियाई संसद से बड़े मामले

ब्रिटिनी हिगिंस से दुष्कर्म का मामला : फरवरी 2021 में पूर्व राजनितिक सलाहकार ब्रिटिनी हिगिंस ने अपने पुरुष सहकर्मी पर संसद भवन में उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। हिगिंस ने कहा था की 2019 में उनके पुरुष सहकर्मी ने उनके साथ सरकार के मंत्री कार्यालय में दुष्कर्म किया था। हिगिंस ने बताया था की उनके नशे में होने का फायदा उठाकर उनके सहकर्मी ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। उस व्यक्ति को अगले ही दिन काम से निकाल दिया गया था मगर इसलिए नहीं की उसने महिलाकर्मी के साथ दुष्कर्म किया है बल्कि इसलिए की देर रात तक कार्यालय में मौजूद रहना सुरक्षा नियमों का उल्लंघन था। हिगिंस ने ये भी बताया की तत्कालीन रक्षा मंत्री लिंडा रेनल्ड्स ने उन पर दबाव बनाया की पुलिस के पास जाने पर उनकी नौकरी जा सकती है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इस पर ब्रिटिनी हिगिंस से माफी भी मांगी थी।

ऑस्ट्रेलियाई संसद से अश्लील वीडियो और तस्वीरें लीक : हाल ही में मार्च में ऑस्ट्रेलियाई संसद का एक वीडियो लीक हुआ है। जिसमें वहां का स्टाफ आपत्तिजनक हरकतें करता नजर आ रहा है। मामले का खुलासा करने वाले व्यक्ति टॉम ने मीडिया को बताया ऑस्ट्रेलिया सरकार के स्टाफ और सांसद, संसद भवन में स्थित प्रार्थना घर का इस्तेमाल गलत कामों में करते हैं। साथ ही ये बात भी सामने आयी है की संसद भवन में देह व्यापार करने वाले लोगों को भी लाया जाता है और यहाँ का स्टाफ आपस में रोज ऐसी अश्लील तस्वीरें शेयर करता है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इसे शर्मनाक और अपमानजनक बताया था।

लगातार सामने आ रहे हैं यौन उत्पीड़न के मामले : ब्रिटिनी हिगिंस के लगाए आरोप के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया में संसद से लगातार महिला यौन उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें एक बड़ा मामला सन 1988 से आया है। जिसमें एक महिला नेता ने एक कैबिनेट मंत्री पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। एक विपक्षी सांसद के खिलाफ भी दुष्कर्म के मामले की जांच चल रही है।

मार्च में महिलाओं में यौन उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव को लेकर किया था प्रदर्शन : मार्च 2021 में ही ऑस्ट्रेलिया की महिलाओं ने जस्टिस मार्च निकाला था। ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं के साथ लगातार हो रही यौन हिंसा और लैंगिक भेदभाव को लेकर ऑस्ट्रेलिया की महिलाओं में रोष की भावना है। ऑस्ट्रेलिया में ये जस्टिस मार्च लगभग सभी मुख्य शहरों में निकला गया था। साथ ही महिलाओं ने संसद को याचिका देकर कार्यवाही की मांग भी की थी। यहाँ आयोजकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मिलने के निमंत्रण से भी इंकार कर दिया था।

ऑस्ट्रेलिया में रेप के आंकड़े भी चौंकाने वाले

2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 52.2 लाख लोग यौन उत्पीड़न का शिकार थे। यहाँ हर छठी महिला रेप की विक्टिम थी , ज्यादातर रेप विक्टिम 15 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं थी। 16.4 फीसदी महिलाओं ने अपने पार्टनर के अलावा अन्य व्यक्ति पर रेप करने की रिपोर्ट की थी। इस मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया में तीसरे स्थान पर था। एनएसडब्ल्यू रेप क्राइसिस सेंटर के अनुसार 70 फीसदी से ज्यादा यौन हमले दोस्तों, परिवार के सदस्यों या सहयोगियों द्वारा किये गए थे। रेप के एक फीसदी आरोपी पूरी तरह से अनजान लोग थे मतलब रेप के 99 प्रतिशत आरोपी जान पहचान और मिलने वाले लोगों में से थे।