श्वेता शर्मा

पाकिस्तान और नेपाल के लोग भारत के लोगों से ज्यादा खुश रहते हैं। ये हम नहीं वर्ल्ड हैप्पीनैस लिस्ट कह रही है। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2021 के मुताबिक लगातार चौथे साल फिनलैंड को दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया है। हैपीनेस इंडैक्स में भारत दुनिया के किसी भी समृद्ध देश के आसपास नहीं है। दुनियाभर के 149 देशों में मापे जाने वाले इस इंडैक्स में भारत 139वें स्थान पर है। भारत से पीछे या कहें कि कम दुखी सिर्फ 10 देशों के लोग हैं। इसके अतिरिक्त दुनिया के अन्य देश के लोग भारत से ज्यादा खुश हैं। भारत के पड़ौसी देश नेपाल और पाकिस्तान से भी ज्यादा दुखी हैं भारत के नागरिक। 2016 से तो भारत इस इंडैक्स में लगातार पिछड़ रहा है। 2017 में इस सूची में भारत 122वें स्थान पर था। 2018 में ये गिरकर 133वें स्थान पर आ गया। 2019 में 140वें और 2020 में 144वें स्थान पर रहा। 2021 में थोड़ा बेहतर होकर भारत इस इंडैक्स में 139वें स्थान पर आ गया। भारत से पीछे सिर्फ बरंडी, यमन, तंजानिया, हैती, मलावी, लेसोथो, बोट्सवाना, रवांडा और अफगानिस्तान हैं। अफगानिस्तान सबसे दुखी देश माना जाता है।

हर साल 20 मार्च को दुनियाभर में इंटरनेशनल हैप्पीनैस डे मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जुलाई 2011 में इस दिन को मनाने का संकल्प लिया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2012 को पहली बार वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट जारी की गई थी। दूसरी बार 2013 में इसे मनाया गया। इसके बाद 2015 में तीसरी रिपोर्ट जारी हुई और 2016 से इसका प्रकाशन प्रति वर्ष होता आ रहा है।

क्या हैं खुशी के पैरामीटर्स

हैप्पीनेस डे की रिपोर्ट बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण और आवश्यक मानकों पर सवाल पूछे जाते हैं। यूनाइटेड नेशंस की ओर से जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में एक सर्वे के आधार पर लोगों से 1 से 10 के स्केल पर कुछ सामान्य सवाल पूछे जाते हैं और उन्हीं के जवाबों के आधार पर इस रिपोर्ट का सत्यापन किया जाता है। ये सामान्य सवाल लोगों की सोशल लाइफ से जुड़े होते हैं जैसे लोग कितने भ्रष्ट तथा कितने उदार हैं, कठिन परिस्तिथियों में उन्हें कितना सामाजिक सहयोग मिल पाता है और साथ ही इसमें 6 आधारभूत आधार होतें हैं जिनमे प्रति व्यक्ति आय , सामाजिक सहायता , अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता , स्वास्थ्य स्तर और उदारता तथा भ्रष्टाचार के प्रति लोगों की सोच शामिल होती हैं। इन्ही सब के साथ हर साल के हिसाब से लोगों को प्रभावित करने वाली वजहों का भी अध्ययन होता है। इसी आधार पर ये लिस्ट तैयार की जाती है।

भारत में क्यों इतने दुखी हैं लोग

भारत में लोगों के दुखी होने के पीछे कई अहम वजहें हैं। बेरोजगारी, गरीबी, कम आमदनी, हिंसा, अशिक्षा और सरकार पर भरोसा ना होना सहित इसके कई कारण हैं।

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addresses at the inauguration of the National Metrology Conclave and the 75th CSIR-National Physical Laboratory Foundation Day celebrations, through video conferencing, in New Delhi on Jan 4, 2021. (Photo: IANS/PIB)

खुशी के मानकों को देखा जाए तो प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत में 2020 के आकड़ों के अनुसार प्रति व्यक्ति आय 11, 254 रुपये प्रति माह है। आईएमएफ की 2017 की रिपोर्ट देखी जाए तो प्रति व्यक्ति आय के मानकों पर विश्व में भारत का स्थान 126वां है। इसी तरह देश स्वास्थ्य सेवाओं की बात की जाए तो 2018 मेडिकल जर्नल लेसेन्ट के अध्ययन के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक उनकी पहुँच में भारत विश्व के 195 देशों में 145 वें स्थान पर था। भारत इसमें अपने पड़ौसी देशों जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान से भी पीछे है।

स्वतंत्रता और स्वतंत्र निर्णय की बात की जाए तो भारत का स्थान डेमोक्रेटिक इंडेक्स में भी लगातार गिरता हुआ ही नजर आ रहा है। 2014 के बाद से अब तक लोकतंत्र सूचकांक में भारत 26 रैंक तक नीचे गिर चुका है। भारत में महिला सुरक्षा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। 2019 में थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक भारत महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, जबरन विवाह, मानव तस्करी कर महिलाओं को सेक्स धंधों में जबरन धकेलने में भारत बहुत आगे हैं।


मॉब लिचिंग के बढ़ते मामलों ने भी भारत में नागरिक सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा रखा है। 2019 में गैर सरकारी संगठन ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में 180 देशों में भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रेस स्वतंत्रता के मामले में भी सबसे खराब स्थिति वाली श्रेणी प्राप्त थी। प्रसन्नता के सभी मानकों से देखा जाए तो किसी में भी भारत की स्थिति ठीक नहीं कही जा सकती है।

विकासवादी अर्थव्यवस्था नहीं होती प्रसन्नता में योगदायी

आंकड़ों की मानें तो सिर्फ विकास की ओर भागते हुए देश प्रसन्नता में भी आगे हों यह आवश्यक नही। महाशक्ति अमरिका भी इस हैप्पीनेस इंडेक्स में लगातार गिर रहा है। आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि बढ़ती हुई जीडीपी, बढ़ता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रसन्नता में योगदायी नहीं होते हैं। नागरिक सुरक्षा हैप्पीनेस रिपोर्ट के एक लेखक जॉन हेलीवेल ने बताया कि ”सबसे खुश देश वो है जहां पर लोगों को अपनेपन का एहसास होता है। जहां वे एक दूसरे पर और अपने संस्थानों पर भरोसा करते हैं।” इससे साफ है कि लोगों के खुश रहने के लिए जरूरी है उनका सरकार पर भरोसा, सुरक्षा का भाव और आपसी अपनापन।