अंकित कात्यायन

फरवरी महीना कभी 28 का तो कभी 29 का होता है। आखिर ऐसा क्यों? पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करने में 365 दिन 5 घंटे और 48 मिनट लगते हैं। तो चार सालों पे एक दिन बढ़ जाता है और उस साल को लीप ईयर कहते हैं। जिसकी वज़ह से हर चार सालों में फरवरी 29 दिनों का हो जाता है। पर फरवरी में ही एक दिन क्यों बढ़ता है और ये महीना ही 28 का क्यों होता है? इसके पीछे एक बड़ा दिलचस्प किस्सा है, चलिए जानते हैं।

जब कैलेंडर में 10 महीने का ही होता था साल, दिन थे 304…

जिस कैलेंडर को देख के हम अपने दिन की शुरुआत करते हैं, वो रोमन कैलेंडर पर आधारित है। पुराना रोमन कैलेंडर 10 महीने का होता था और उसमें सिर्फ 304 दिन होते थे। पर इसकी वज़ह से त्यौहार सही समय से नहीं हो पाते थे। तब वहाँ के राजा नुमा पोम्पिलीयुस ने चंद्रवर्ष के आधार पर वर्ष की गणना करवाई। जिसकी वज़ह से दो महीने जोड़ने पड़े जनवरी और फरवरी। अब कैलेंडर 354 दिन और 12 महीनों का हो गया। जिसमें दोनों नए महीनों को 28, 28 दिनों का बना दिया गया।

रोमन सभ्यता में 28 को अशुभ माना जाता है, इस कारण से जनवरी को 29 का कर दिया गया पर फरवरी 28 का ही रह गया। अब कैलेंडर 355 दिनों का हो गया।
रोम के लोग इसी वजह से फरवरी को अशुभ मानते थे, और इसी महीने में वहाँ पर मृत आत्माओं के लिए पूजा भी की जाती है।

कहानियां भले ही अशुभ बताए, पर हक़ीक़त में कई मायनों में ख़ास है फरवरी

फरवरी में ही पेश होता है भारतीय बजट

हर साल फरवरी की पहली तारीख़ को बजट पेश होता है। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार बजट लाती है। हर विभाग के लिए एक राशि तय की जाती है कि उस साल उस विभाग में सरकार कितना खर्च करेगी। बजट पेश करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्री पर होती है।

प्यार का सप्ताह है यह फरवरी

इस महीने 7 से 14 फरवरी तक वैलेंटाइन वीक मनाया जाता है। पूरी दुनिया में हर दिन लोग नए-नए तरीकों से अपने प्यार का इज़हार करते हैं। इसमें गुलाब देना, इज़हार करना, चॉकलेट देना, टेडी देना, वादा करना, गले लगाना, चूमना और आख़िरी दिन वैलेंटाइन मनाते हैं। इसलिए फरवरी को प्रेम करने वालों का महीना भी कहा जाता है।

मौसम का राजा बसंत का आगमन भी इसी माह

इसी महीने बसंत का आगमन भी होता है। बसंत को मौसम का राजा कहा जाता है, क्योंकि ये सबसे सुनहरा मौसम है। हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार बसंत पंचमी मनाई जाती है। तब विद्या की देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।

गुलाबी महीना, गुनगुनी धूप… मस्त महीना

सुनहरे मौसम की वज़ह से इसे गुलाबी ठण्ड का महीना भी कहा जाता है। सुबह-शाम ठंडक और दिन में गुनगुनी धूप इस महीने को ख़ास बनाता है। यूरोप में इस महीने लोग फैमिली प्लानिंग करते हैं।