श्वेता शर्मा

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से सैन्य शासन, फिर लोकतंत्र से दोबारा सैन्य शासन तक म्यांमार की कहानी

म्यांमार आज दुनियाभर में चर्चा में है। चर्चा की वजह है वहां चल रही लोकतांत्रिक सरकार का दमन कर सेना का अपने हाथ में सत्ता ले लेना। सेना के इस कदम के बाद म्यांमार पूरी तरह हिल चुका है। लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन वहां हो रहे हैं। म्यांमार वो देश है जहां सदियों से राजनीतिक उथल-पुथल चलती आ रही है। अभी दस साल पहले ही नया-नया लोकतंत्र बना म्यांमार एक बार फिर संकट में है। म्यांमार की प्रमुख aung san suu kyi को गिरफ्तार कर दोबारा सेना के हाथ सत्ता आना म्यांमार में कोई नई बात नहीं है। ये देश वर्षों से राजतन्त्र और लोकतंत्र के बीच की चक्की में पिसता चला आ रहा है। आपके लिए यह जानना भी रोचक होगा कि म्यांमार कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था। इसके भारत से अलग होने, लोकतंत्र बनने और फिर राजतंत्र के साथ इसके संघर्ष के बाद आजादी से अब तक के लोकतंत्र और राजतन्त्र के बीच के संघर्ष की कहानी अनोखी है।

इन 12 पाॅइंट्स में जानिए म्यांमार की अबतक की कहानी

  • 1826 ईस्वी में प्रथम बरमा युद्ध में अंग्रेजो ने आरावन और टेनेसरीम पर कब्जा किया , इसके बाद सन् 1852 ई. में दक्षिण भाग पर और 1886 ई. में पूरे बर्मा पर अधिकार कर अंग्रेजों ने इसे ब्रिटिश भारतीय शासन के अंतर्गत रख लिया।
  • 1937 से पूर्व तक ये भारत का राज्य रहा फिर अंग्रेज सरकार ने इसे ब्रिटिश क्राउन कॉलोनी बना लिया।
  • द्रितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा पर जापान का कब्जा हो गया।
  • 1945 में आंग सान की एंटी फासटिस्ट पीपल फ्रीडम लीग के साथ मिलकर ब्रिटेन ने बर्मा को जापान से आजाद करवाया।
  • 1947 में आंग सान की हत्या कर दी गई जो आज म्यांमार के राष्ट्रपिता माने जाते हैं।
  • आंग सान के साथी यू नू के नेतृत्व में 4 जनवरी 1948 में बर्मा को ब्रिटिश राज से आजादी मिली। मुक्त होने के बाद 1962 तक बर्मा लोकतान्त्रिक रहा।
  • 2 मार्च 1962 को जनरल के नेतृत्व में सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया, 80 के दशक में इसका नाम बदल कर म्यांमार रख दिया गया।
  • 49 साल के सैन्य शासन के बाद 2011 में यहां फिर से नागरिक शासन कायम हुआ।
  • आंग सान सु की पार्टी नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी ने चुनाव जीता, मगर क्योंकि उन्होंने एक विदेशी नागरिक से शादी की थी इसलिए उनके देश का संविधान उन्हें राष्ट्रपति बनने की अनुमति नहीं दे सकता था।
  • 2020 में फिर से आंग सान सु की ने अपनी पार्टी को जिताया। मगर 2021 में अब फिर से सेना के कमांडर इन चीफ मिन आंग ह्लाइंग ने आंग सान सु की और राष्ट्रपति विन म्यिंट सहित कई नेताओं को हिरासत में लेकर सत्ता अपने हाथो में ले ली।
  • म्यांमार की जनता अपने नेताओ की गिरफ्तारी और सैन्य शासन का पुरजोर विरोध कर रही है। इसे लेकर कई प्रोटेस्ट और आंदोलन चल रहे हैं और म्यांमार की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

कौन है आंग सान सु की , जिनकी रिहाई को लेकर जनता कर रही है आंदोलन

आंग सान सु की म्यांमार के राष्ट्रपिता आंग सान की बेटी हैं, जिनकी 1947 में राजनीतिक फायदे के लिए हत्या कर दी गई थी। आंग म्यांमार की एक प्रमुख नेता और लेखिका भी है। लोकतंत्र के लिए संघर्ष करते हुए अलग अलग अवधियों में आंग सान 14 साल तक नजरबंद और कैद रहीं। aung san suu kyi को नोबेल शांति पुरूस्कार , जवाहलाल नेहरू पुरूस्कार और भगवान् महावीर विश्व पुरूस्कार जैसे सम्मान प्राप्त हैं। म्यांमार में लोकतंत्र बहाल कराने की लड़ाई में आंग सान सु का सबसे अहम योगदान रहा है। इसी के चलते म्यांमार में उनके प्रति लोगों की आस्था काफी ज्यादा है। मगर पिछले कुछ वर्षों में रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर उनके कुछ नहीं बोलने और इस मसले पर चुप्पी साधे रहने के चलते उनकी आलोचना भी काफी हुई है।