सुरभि जैन

महिलाओं को मतदान का अधिकार सबसे पहले किस देश ने दिया, सबसे बाद में देने वाला देश कौन

नई दिल्ली. आज देश में 21वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। वही मतदाता जो सरकार को चुनता भी है और सरकार को सत्ता से बेदखल भी करता है। आज उसी जनता का दिन है। चुनाव आयोग के 61 साल पूरे होने पर 25 जनवरी 2011 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने की शुरुआत की। मकसद था वोटरों को उनके इस अधिकार का महत्व बताना और इसका शत प्रतिशत उपयोग करना। आज के दौर में इस दिवस की अहमियत और बढ़ जाती है जब बड़े-बड़े लोकतांत्रिक देशों में लोकतंत्र के खतरे जैसी आवाजें उठ रही हों। इस खास मौके पर आपको बताते हैं मत और मतदान को लेकर जरूरी व कुछ रोचक बातें।

महिलाओं को मतदान का अधिकार देने वाला पहला देशः न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश है जिसने 1893 में महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया और सऊदी अरब साल 2015 में सबसे बाद में महिलाओं को मताधिकार देने वाला देश है।

ज्यादातर देशों में कब होता है मतदानः दुनिया के ज्यादातर देशों में रविवार को मतदान होता है। ऐसा इसलिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अवकाश की वजह से मतदान देने में हिस्सा ले सकें। अमेरिका में आमतौर पर यह मंगलवार को होता है।

यहां वोट नहीं करने पर है भारी जुर्मानाः ऑस्ट्रेलिया में वोट नहीं देने पर जुर्माना भरना पड़ता है। वहां अगर कोई व्यक्ति वोट ना दे तो उसे 20 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना चुकाना पड़ता है।

जब दुनिया का सबसे भ्रष्ट चुनाव हुआः दुनिया का अब तक का सबसे भ्रष्ट चुनाव लाइबेरिया में साल 1927 में हुआ था। उस समय सिर्फ 15000 योग्य मतदाता थे, इसके बावजूद भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे चार्ल्स डी.बी.किंग को 234000 वोट पड़े और उसके विरोधी को 9000 वोट मिले।

और जब चिल्लाकर होती थी वोटिंगः बहुत पहले स्पार्टा नाम की जगह पर सदन में चिल्लाकर वोटिंग की जाती थी जो पक्ष सबसे ज़ोर से चिल्लाता था उसकी जीत हो जाती थी।

वोटर के लिए वो सब कुछ जानिए जो एक नागरिक को जानना जरूरी है…

भारत में कौन वोट दे सकता है?

भारत के संविधान के मुताबिक, जो भारत का नागरिक है और जिसकी उम्र 18 साल या उससे ज्यादा है। बिना किसी भेदभाव या सिटीजनशिप एक्ट के तहत इन लोगों को वोटिंग अधिकार दिया जाता है। जिस NRI के पास इंडियन पासपोर्ट होता है, उन्हें भी वोट देने का अधिकार होता है।

फिलहाल देश में 91 करोड़ मतदाता, जिसमें करीब 44 करोड़ महिला

साल 2019 के चुनावों के मुताबिक देश भर में कुल मतदाताओं की संख्या 91.05 करोड़ है, जिसमें पुरुष मतदाता 47.26 करोड़ और महिला मतदाता 43.78 करोड़ है। लोकसभा में 543, वहीं विधानसभा के लिए 4126 सीटें हैं। सबसे कम मतदाता वाली लोकसभा सीट लक्षद्वीप है जहां मात्र 43.97 हजार मतदाता हैं, वहीं सबसे ज्यादा मतदाता वाली लोकसभा सीट मलकाजगिरी (तेलंगाना) है जहां 29.5 लाख मतदाता हैं।

पहले चुनाव के दौरान 7.38 लाख आबादी पर सांसद था, अब औसतन 25 लाख पर

अगर भारत की बात की जाए तो यहां पहले चुनाव के वक्त 7.38 लाख की आबादी पर एक लोकसभा सांसद था। वहीं आज औसतन 25.25 लाख लोगों पर एक सांसद चुना जाता है जो कि दुनिया में सबसे ज्यादा है। अगर यूरोपीय यूनियन की बात करें तो 6.57 लाख लोगों पर एक सांसद का चुनाव होता है। यह संख्या अमेरिका में 5.96 लाख, बांग्लादेश में 5.54 लाख , चीन में 4.54, पाकिस्तान के लिए 4.39 लाख और ब्राजील जैसे देश के लिए 3.53 लाख है।

संविधान के अनुसार 10 लाख की आबादी पर लोकसभा सीट होनी चाहिए, पर अभी 25 लाख तक भी है

संविधान के अनुसार 10 लाख की आबादी पर एक लोकसभा सांसद होना चाहिए। लेकिन भारत में ये आबादी 25 लाख है। राज्यों में आबादी के हिसाब से संख्या को बढ़ाने और घटाने की बात कही गई है। इस हिसाब से 30 लाख लोगों पर एक सांसद और तमिलनाडु में करीब 20 लाख लोगों पर एक सांसद है। और जिन राज्यों में आबादी 6 लाख या उससे कम है, तो 10 लाख आबादी वाला कॉन्सेप्ट वहां लागू नहीं होगा। ऐसे में इस तरह के राज्यों में एक सांसद तो रहेगा।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा लोकसभा-विधानसभा सीटें, पुडुचेरी में सबसे कम 30 विधानसभा सीटें

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा की सीटें हैं तो वहीं अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, दमन एवं दीव, दादर और नागर हवेली, नागालैंड, पुडुचेरी, मिजोरम, लक्ष्यदीप और सिक्किम जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में केवल एक लोकसभा सीट है। विधानसभा सीटों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश में ही सबसे ज्यादा 403 विधानसभा सीटें हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 295 सीटें, महाराष्ट्र में 288, बिहार में 243, तमिलनाडु में 235 और मध्य प्रदेश में 230 सीटें हैं। सबसे कम विधानसभा सीटें पुडुचेरी में 30 सीटें हैं। इसके बाद सिक्किम में 32 विधानसभा सीटें हैं।