सुरभि जैन

एनडीटीवी की मशहूर पत्रकार निधी राजदान अचानक एनडीटीवी छोड़ देती हैं। सूचना आती है कि उन्हें Howard University में associate professor के पद पर नौकरी मिल गई है। इसके लिए उन्हें बकायदा अधिकारिक ई-मेल आते हैं, उनकी फोन पर बात होती है और व्यक्तिगत इंटरव्यू भी। मगर नौकरी नहीं लग पाती। कुछ समय बाद मालूम पड़ता है कि निधी के साथ धोखाधड़ी हुई। उनकी निजी जानकारियां लेने के लिए उनके साथ धोखा किया गया। यह दरअसाल नौकरी का प्रस्ताव नहीं एक वैल प्लांड फिशिंग अटैक था। निधि ने हिम्मत दिखाते हुए इसे लोगों के साथ शेयर किया।

फिशिंग की यह घटना आपको अनोखी लग सकती है। मगर यह अनोखी नहीं है। कोरोना के बाद दुनियाभर में फिशिंग की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में आईबीएम सिक्योरिटी की टास्क फोर्स ‘एक्सफोर्स’ ने आगाह किया था कि कोविड-19 की कोल्ड चैन से जुड़ी संस्थाओं को टारगेट करने के लिए एक वैश्विक फिशिंग अभियान चलाया जा रहा है। गूगल से एकत्रित जानकारी के अनुसार पिछले साल अप्रैल में कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में फिशिंग अटैक की की संख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। तब विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी फिशिंग के बारे में लोगों को सतर्क रहने के लिए एडवाइजरी जारी करना पड़ गई थी। द कॉस्ट आफ साइबर क्राइम’ नामक सालाना रिपोर्ट के अनुसार हर साल 16 प्रतिशत की दर से इस तरह के साइबर अटैक्स बढ़ रहे है। लगभग 85 प्रतिशत फिशिंग के मामलों में सोशल मीडिया साइट्स के जरिए अटैक होना पाया गया है।

ऑनलाइन फिशिंग के बहुचर्चित मामले

Sony pictures का डाटा चोरी और 730 करोड़ का नुकसान

2014 में सोनी पिक्चर्स में सैकड़ों कर्मचारियों को ईमेल भेजे गए। हैकर्स ने कर्मचारियों की लिंक्डइन प्रोफाइल से उनकी जानकारी जुटाकर, खुद को कंपनी कर्मचारी बताया और मालवेयर से भरे मेल भेजे। इससे कंपनी की फाइल्स, वित्तीय रिपोर्ट और ग्राहकों का मिलाकर कुल 100 टीबी डाटा चोरी कर लिया गया। इससे सोनी को 730 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

कॉलेज के नाम पर ठगी

पुणे स्थित Symbiosis medical college for women की नकली वेबसाइट बनाकर एनआरआई कोटे से पेमेंट का मामला हाल ही में सामने आया है। फिशिंग के लिए संस्थान की हूबहू वेबसाइट बनाई गई थी जिसके जरिए ठगी की गई।

Ukraine में Blackout

दिसंबर 2015 में हैकर्स ने यूक्रेन की तीन बिजली वितरण कंपनी के कर्मचारियों को फिशिंग हमला करके ब्लैकआउट कर दिया था। 6 घंटे तक यूक्रेन का बड़ा हिस्सा अंधेरे में रहा था। फिशिंग के जरिए ब्लैकआउट का यह पहला मामला था।

Belgium का बैंक फ्रॉड

बेल्जियम का ‘क्रेलेन बैंक ’ऐसे ही फिशिंग अटैक का शिकार हुआ। कंपनी की इंटरनल ऑडिट के दौरान फिशिंग हमले का पता चला। इससे बैंक को तकरीबन 75 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।

फेक वेबसाइट के जरिए ठगी

मुंबई पुलिस ने अभी कुछ समय पहले ही 6 लोगों को 123 फेक वेबसाइट्स की क्लोनिंग के लिए गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने 10 हजार लोगों से 10 करोड़ रु. से ज्यादा की ठगी की। आरोपियों ने सरकारी वेबसाइट्स की क्लोनिंग से भी लोगों को ठगा।

Google-Facebook पर अटैक

2013 से 2015 के बीच लिथुनिया के एक शख्स ने गूगल-फेसबुक के ढेरों कर्मचारियों को फिशिंग हमले से 100 मिलियन डॉलर की चपत लगाई थी। साल 2017 का यह मामला तब काफी सुर्खियों में था।

क्या है ऑनलाइन फिशिंग

फिशिंग यानी भ्रमित करके किसी को फंसाना। किसी भी बैंक या कंपनी के ईमेल जैसे ही दिखने वाले ई-मेल से एक लिंक सेंड की जाती है जिस पर क्लिक करने पर असली वेबसाइट के हुबहू दिखती वेबसाइट पर यूजर पहुंच जाता है जहां अपनी क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते आदि की डिटेल यूजर डालता है जो की सीधे हैकरों के हाथ में पहुंच जाती है जिसका वे किसी भी तरीके से गलत इस्तेमाल कर सकते हैं