श्वेता शर्मा

  • कभी Forbes की अमीरो की सूची में शामिल होने वाला कारोबारी आज भगोड़ों की सूची में शामिल

देश के एक बड़े सार्वजनिक बैंक पंजाब नेशनल बैंक से घोटाले और जालसाजी के आरोप में फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाए जाने की तैयारी हो रही है। नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण मतलब दूसरे देश के आरोपी को उसके देश को लौटने की प्रक्रिया के पक्ष में कल ब्रिटिश अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा की नीरव मोदी को अब भारतीय अदालतों के सामने जवाब देना है और ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता जिससे ये इशारा मिलता हो की भारत में उसके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। ब्रिटिश अदालत के इस फैसले के बाद मुंबई की आर्थर रोड जेल में नीरव मोदी के लिए एक कोठरी तैयार कर ली गई है। जेल सूत्रों की दी जानकारी के अनुसार नीरव मोदी को विशेष सुरक्षा वाली बैरक नंबर 12 की किसी एक कोठरी में रखने की योजना है। नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की एक जेल में रहे और अब वो अपने प्रत्यर्पण की कानूनी लड़ाई हार गए हैं।

ये तो हुई नीरव मोदी के भारत लौट आने की बात, लेकिन यदि आप भूल गए हैं की क्या कुछ किया था इस हीरा कारोबारी ने तो ये हम आपको रिकॉल कराते हैं। बताते हैं कि कैसे हुई थी इतनी बड़ी जालसाजी और क्या कुछ असर हुआ इस स्कैम का पीएनबी बैंक की प्रतिष्ठा और संपत्ति पर –

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कैसे और कब हुआ ये घोटाला

Punjab National Bank का ये घोटाला भारतीय बैंकिंग में सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है। और इस घोटाले के मैन मास्टरमाइंड थे नीरव मोदी। सीबीआई और ईडी की मानें तो ये घोटाला कुल 11,400 करोड़ रुपये का है और इस घोटाले को पूरा करने वाला सिर्फ अकेला नीरव मोदी ही नहीं है। इसमें उनके साथ उनकी पत्नी Ami nirav modi, भाई Nischal Modi और मामा Mehul Choksi भी शामिल है। सिर्फ ये ही नहीं पीएनबी के कुछ कर्मचारी भी इस घटना में इनके साथ लिप्त पाए गए थे। डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी और एक और बैंक कर्मी मनोज खरात से साथ मिलकर ये खेल 2011 से खेला जा रहा था। जिसका 2018 में भंडाफोड़ हुआ था। दरअसल इन लोगो को अपनी डाइमंड कम्पनीज, डाइमंड आरयूएस, सोलर एक्सपोर्ट और स्टेलर डायमंड के लिए माल मंगवाना था। जिसके लिए इन्होनें जनवरी 2018 में मुंबई में पीएनबीकी शाखा से संपर्क किया और कहा की बैंक इस माल के भुगतान के लिए एक एलओयू(लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) जारी कर दे।

एलओयू ट्रेड फाइनैंस में एक बैंक के द्वारा दूसरे बैंक को भेजी गई एक गारंटी होती है। स्विफ्ट प्लैटफॉर्म पर भेजा गया मैसेज एक बैंक से दूसरे बैंक को भेजे गए डिमांड ड्राफ्ट की तरह होता है। यहां एलओयू जारी करवाने से nirav modi का मकसद ये था की बैंक उनके खरीदे सामान के बिल का भुगतान करे और बैंक इसके लिए राजी भी हो गया। नीरव मोदी से कहा गया की वो बैंक में 280 करोड़ रुपये नकद जमा करा दें तो बैंक उनके लिए एलओयू जारी कर देगा। नीरव मोदी इससे पहले भी बिना नकद के LOU जारी करवाते आ रहे थे। इसे लेकर जब नीरव मोदी ने कहा कि वह पहले भी बिना नकद दिए एलओयू जमा कराते आ रहे हैं। तब बैंक के एक तत्कालीन अधिकारी को संदेह हुआ। बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया की नीरव मोदी और उनके भाई , पत्नी या पार्टनर का तो बैंक में कोई रिकॉर्ड था ही नहीं। जांच आगे बढ़ाने पर सामने आया की नीरव मोदी बैंक कर्मी गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खरात के साथ मिलकर ऐसे ही एलओयू जारी करवाते आए हैं।

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गोकुलनाथ शेट्टी ने स्विफ्ट (Society of worldwide interbank financial telecommunication ) मेसेजिंग सिस्टम से इस घोटाले को अंजाम दिया। क्योंकि इंटरनेशनल बैंकिंग के स्विफ्ट मैसेज पीएनबी के सॉफ्टवेयर में तुरंत नहीं दिखते थे। साथ ही बैंक लापरवाही भी कही जा सकती है कि उन्हें जांचा नहीं गया। ऐसे में नीरव मोदी को भुगतान करने के लिए पैसे मिल जाते थे मगर कोर सिस्टम में कुछ दर्ज ना होने से वो बैंक को पैसे देने से बच जाते थे। सीबीआई में केस दर्ज हुआ और जनवरी 2018 तक 280 करोड़ के मामले की जांच चलने लगी मगर फिर फरवरी 2018 में सामने आया की ये सब तो 2011 से चलता चला आ रहा है और पूरा घोटाला 11400 करोड़ रुपये का है। इसके बाद सीबीआई ने मुंबई ब्रैडी रोड ब्रांच जो की इस घोटाले का केंद्र थी उसे सील किया और लगभग 10 कर्मचारी निलंबित किए गए।

फिर कैसे भागे मुफ्तखोर

नीरव मोदी पहले ही देश छोड़ चुके थे फिर उनके भाई जो बेल्जियम के नागरिक थे 1 जनवरी 2018 को देश से निकल गए। फिर उनकी पत्नी जिन्हे अमरीकी नागरिकता प्राप्त थी वो 6 जनवरी 2018 को भारत छोड़ गई। मेहुल चौकसी ने भी 4 जनवरी को ही देश की सीमाएं लांघ ली थी। 2018 में ही इनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था।

पीएनबी पर क्या हुआ असर

क्योंकि ये घोटाला बैंकिंग सेक्टर का बहुत बड़ा घोटाला था। इस घोटाले ने पीएनबी की कमर तोड़ कर रख दी थी। घोटाले से न सिर्फ बैंक को कैपिटल का घाटा हुआ बल्कि भारतीय बैंकिंग बाजार में के बड़े सार्वजानिक स्तर के बैंक की साख भी बहुत गिर गई थी। इतना बड़ा चूना लगने के बाद pnb अगली तीन तिमाहियों में जोरदार घाटे से गुजरा और इसके स्टॉक्स में भी गिरावट देखने को मिली। प्रचंड घोटाले का असर इन्वेस्टर्स पर भी पड़ा था। पीएनबी के 43 प्रतिशत शेयर्स पब्लिक के पास थे। इस घोटाले के असर से सिर्फ दो दिन में ही इस बैंक के शेयर्स 20 प्रतिशत गिरे और मार्केटकैप 8000 करोड़ रुपये तक घट गया था। फरवरी 2018 से फरवरी 2019 तक इस बैंक के शेयर्स में रिकॉर्ड 56 फीसदी गिरावट दिखाई दी, शेयर्स अंडरवैल्यू हो गए।

बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े स्कैम के साथ-साथ इसके चलते पीएनबी ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा घाटा झेला। जो कि तीन तिमाहियों में 1.90 अरब डॉलर दर्ज किया गया। हालांकि इसके ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। क्योंकि ये एक सार्वजानिक क्षेत्र का बैंक था तो जनता के पैसो की जिम्मेदारी सरकार की थी। कुछ समय बाद इस बैंक के पुनरुत्थान के लिए केंद्रबैंक सरकार ने इसमें 2 अरब डॉलर का संचार किया। ये राशि बैंक की कैपिटल बढ़ाने के साथ साथ इसके लोन ग्रोथ को भी बढ़ाने के लिए दी गई थी। इसका बाद में लाभ भी देखने को मिला। 2020 में दो बैंक ओरिएंटल और यूनाइटेड बैंक को पीएनबी में मर्ज भी किया गया।

कौन है नीरव मोदी

Nirav modi का जन्म 27 फरवरी 1971 को जामनगर , गुजरात में हुआ था। मगर उनकी परवरिश एंटवर्प, बेल्जियम में हुई थी। बाद में ये 19 साल के होने पर भारत आ गए। 2010 में नीरव मोदी ग्लोबल डायमंड ज्वेलरी हाउस की स्थापना की और ग्लोबल लेवल पर अपना व्यापार फैलाया। क्रिस्टी और सोथेबीस कैटलॉग पत्रिकाओं के कवर पेज पर प्रदर्शित होने वाले ये पहले भारतीय जोहरी हैं।2017 में फोर्ब्स की दुनिया भर के अरबपतियों की लिस्ट में नीरव मोदी 1234वें स्थान पर थे और भारतीयों में उनका नंबर 85वां था।