• एक्टर सोनू सूद बोले- फिल्म टिकट के लिए ब्लैकमेलिंग होते तो देखा था लेकिन सांस की हवा भी ब्लैक होते पहली बार देख रहा हूं

मुकेश महतो

पिछले दो सप्ताह से कोरोना वैक्सीन और दवाई के बाद जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा है वो है ऑक्सीजन। आज देश के कई हिस्सों में अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजन ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं। पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 3 लाख 15 हजार कोरोना वायरस के संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं 2100 से अधिक लोगों की इससे मौत हो गई। पिछले दो सप्ताह में रोजाना हजार से दो हजार मरीजों की मौत हुई है। पहले दवाई और बेड नहीं मिलने के कारण मरीजों की मौत की बात सामने आ रही थी, अब ऑक्सीजन नहीं मिलने से मरीजों की मौत की खबरें छाई हुई हैं।

कहीं अस्पताल में ऑक्सीजन लीक होने की खबर है तो कई अस्पतालों में ऑक्सीजन का स्टॉक ही खत्म है। कई अस्पतालों में तो नोटिस तक चिपका दिए गए हैं कि मरीज के परिजन ऑक्सीजन खुद लेकर आएं। बाजारों में ऑक्सीजन की ब्लैकमेलिंग शुरू हो गई है तो मरीज दिन-रात एक कर ऑक्सीजन की जुगत में लगे हैं। सरकार से लेकर आम लोग भी आज ऑक्सीजन की जिक्र करते नजर आ रहे हैं। हम आपको बताते हैं आखिर यह है क्या चीज और इसकी किल्लत से कितने भयावह परिणाम देखने को मिल रहे हैं…

प्राकृतिक हवा है तो इस ऑक्सीजन की जरूरत क्यों

जैसा कि हम सभी को मालूम है कि हम सांस में प्राकृतिक हवा लेते हैं। और जो सांस हम खुली हवा में लेते हैं उसमें ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 21 प्रतिशत होती है। इसके अलावा उसमें 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और आर्गन, नियॉन व ज़ेनॉन गैसें होती हैं। डॉक्टरों के अनुसार जब मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो तो उन्हें शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियां विशेष तकनीक से हवा से अन्य गैसों को अलग कर शुद्ध ऑक्सीजन को इकट्ठा करती है। जिसे मेडिकल ऑक्सीजन कहा जाता है।  

अचानक ऑक्सीजन की इतनी किल्लत क्यों हो गई है

पिछले साल जब कोरोना व्यापक स्तर पर फैल रहा था तब भी ऑक्सीजन की कमी हुई थी। सरकार ने तब भी निरीक्षण किया था और तब प्रतिदिन मिलने वाले कोरोना मरीजों के अनुसार ऑक्सीजन का भंडारण और उत्पादन पर्याप्त था। तब करीब 90 हजार मरीज प्रतिदिन सामने आ रहे थे। लेकिन लेकिन पिछले दो सप्ताह से जिस प्रकार प्रतिदिन मरीज 1 लाख, 2 लाख और अब 3 लाख से ऊपर सामने आ रहे हैं, जिस कारण उपलब्धता और उत्पादन कम पड़ गया है। पिछले दो दिन से 20 राज्यों में हर दिन 6 हजार 785 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत हो रही है।

शरीर में ऑक्सीजन का काम क्या है

हम हवा से ऑक्सीजन लेते हैं जो फेफड़ों के ज़रिए रक्त प्रवाह में शामिल होती है। यहां प्रतिक्रियाएं कर भोजन से ऊर्जा तैयार करता है। जो जीवित रहने के लिए बहुत ज़रूरी प्रक्रिया है। फेफड़े में समस्या या संक्रमण होने पर प्रक्रिया बाधित हो जाती है। ऐसी स्थिति में सांस से ली गई ऑक्सीजन जरूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं होती। ऐसे मरीज़ों को शुद्ध ऑक्सीजन देने की ज़रूरत होती है।

मेडिकल के साथ ऑक्सीजन का इस्तेमाल औऱ कहां

ऑक्सीजन का प्रयोग मरीजों को सांस सपोर्ट देने के साथ मेडिसिन, वेल्डिंग, प्रयोगशालाओं में किया जाता है। जिसकी गणुवत्ता अलग-अलग होती है। ऐसे में ऑक्सीजन तैयार करने वाली कंपनियां इन गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन तैयार कर सप्ताई करती हैं।

भारत में मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाले कितने हैं

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में मेडिकल ऑक्सीजन का सबसे बड़ा निर्माता कंपनी गुजरात स्थित आईनॉक्स एयर उत्पाद है। गोयल एमजी गैसेस दिल्ली, लिंडे इंडिया कोलकाता और राष्ट्रीय ऑक्सीजन चेन्नई भी ऑक्सीजन बनाने वाली बड़ी कंपनियां हैं। देश में 10-12 बड़े निर्माता के साथ 500 ​​से अधिक छोटे गैस-प्लांट भी हैं। सरकार के अनुसार सामान्य दिनों में 5 से 6 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन देश में होता है। लेकिन फिलहाल इसकी मांग काफी बढ़ गई है।

सांस की बीमारी है तो कैसे पता चलेगा

मेडिकल साइंस के अनुसार 18 साल तक के व्यक्ति को सांस लेने के लिए एक मिनट में 8 लीटर प्राकृतिक हवा चाहिए। यानी रोज करीब 11,000 लीटर। इस प्राकृतिक हवा से ऑक्सीजन को अलग करें तो 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है। एक साधारण आदमी एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। यदि वह हर मिनट 12 से कम या 20 से ज्यादा बार सांस लेता है तो यह सांस की बीमारी के लक्षण हो सकता है। अस्पताल के सभी खर्च जोड़ने के बाद एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत 350 रुपए तक हो सती है।

सोशल मीडिया पर हर पोस्ट ऑक्सीजन किल्लत और परेशानी की, रो रहे मरीजों के परिजन

एक्टर सोनू सूद ने ट्वीट किया है- सिनेमा हॉल में टिकट्स की ब्लैक होते हुए देखा था। अब जान बचाने के लिए दवाइयों और ऑक्सीजन की ब्लैक होते देख रहा हूं। पत्रकार अभिनव पांडे ने ट्वीट किया है- सोचिए सांसों के लिए भी कोर्ट के दरवाजे जाना पड़ा रहा है। पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने ट्वीट किया है कि लखनऊ के शेखर हॉस्पिटल में मरीजों को वेंटीलेटर से हटा दिया है.. अस्पताल में कोहराम मचा हुआ है.. मरीजों को तीमारदार हाथ से पंप कर रहे हैं.. लोगों को बचाईये।

ब्रजेश मिश्रा ने ट्वीट किया है कि उत्तर प्रदेश में जो हो रहा है वो मानवता के विरुद्ध है। ऑक्सीजन के लिए तड़प-तड़प कर लोगों के मरने की खबरें हैं। घर वालों का विलाप और तकलीफ देखी नहीं जा रही है। ये अपराध है। अजित अंजुम ने प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी सभा को रद्द करने के ट्वीट को रिट्विट किया है- आने वाली नस्लें भी आपका अहसानमंद रहेंगी सर, अब बस राजधर्म निभाइए। देश को सांसों में उलझने से बचा लीजिए।

ऑक्सीजन को लेकर देश की अदालतों में क्या चल रहा

ऑक्सीजन की किल्लत के बाद हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। मामला अदालत तक पहुंच गया है। देश के 6 हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी कि कुछ भी करें लेकिन मरीजों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं रुकनी चाहिए।

ऑक्सीजन को लेकर केंद्र सरकार ने क्या किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिए हैं कि राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई में रुकावट नहीं आनी चाहिए। उन्होंने ऑक्सीजन प्रोडक्शन और सप्लाई बढ़ाने की भी बात की। अफसरों ने प्रधानमंत्री को बताया कि राज्यों के साथ मिलकर ऑक्सीजन प्लांट्स जल्द शुरू करने पर काम कर रहे हैं।