निखिल शर्मा

देश के गोदी मीडिया के दिखाए जाने वाले आधारहीन सर्वे और रिपोर्टस से परे देश के सोशल मीडिया पर भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए गुस्सा देखने को मिल रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, व्यापार ठप होने और नौकरियां नहीं होने से परेशान देश के लोगों ने इस गुस्से का इजहार करना भी शुरू कर दिया है। कुछ दिनों पहले ही नरेंद्र मोदी की फरवरी 2021 की मन की बात को देशवासियों ने सिरे से नकार दिया। महंगाई की मार झेल रही जनता को नरेंद्र मोदी की मन की बात पसंद नहीं आई। नरेंद्र मोदी के यू-ट्यूब चैनल पर इसे नकार दिया गया। इस मन की बात को देशभर में नरेंद्र मोदी के यू-ट्यूब चैनल से 4.67 लाख लोगों ने देखा। उनके इस वीडियो को पसंद करने वालों की संख्या 17 हजार रही तो वहीं 51 हजार लोगों ने इसे ना पसंद किया।

सोशल मीडिया वो हथियार है जिसके बूते पहले 2014 और फिर 2019 में Narendra modi सरकार सत्ता में आई। अब वही सोशल मीडिया पर सरकार की वास्तविक स्थिति बताने लगा है। मुख्यधारा के मीडिया की रिपोर्टस और सर्वे पिछले लम्बे समय से सवालों के घेरे में रहे हैं और इनपर तथ्यहीन होने के आरोप भी लगते रहे हैं। साथ ही जनता के फीडबैक का विकल्प भी वहां नहीं होता है। ऐसे में सोशल मीडिया को विश्लेषण का सबसे बेहतरीन आधार माना जाता है। नरेंद्र मोदी के प्रति नाराजगी सिर्फ फरवरी की मन की बात में दिखाई नहीं दी है। पिछले सालभर की 12 मन की बात में से ज्यादातर में लोगों ने इसी तरह अपना गुस्सा जाहिर किया है। बताते हैं पिछले साल भर में नरेंद्र मोदी को किस कदर सोशल मीडिया पर नकार दिया गया है।

अगस्त में मिले थे 1.3 मिलियन डिस्लाइक्स

पिछले एक साल की बात करें तो नरेंद्र मोदी को गत वर्ष अगस्त माह में भारी विरोध झेलना पड़ा था। तब नरेंद्र मोदी की मन की बात को 1.3 मिलियन dislikes मिले थे। जबकि likes महज 4.62 लाख ही थे। प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात का प्रसारण कई youtube चैनल्स पर होता है। मगर खास तौर पर बीजेपी और नरेंद्र मोदी के यू-ट्यूब चैनल पर इसे सबसे ज्यादा देखा-सुना जाता है। ऐसे में इन दोनों चैनल्स पर लोगों के रिएक्शन देखें तो साफ पता चलता है कि लोगों को अब नरेंद्र मोदी की मन की बात जनता की मन की बात के बजाय सरकार की मन की बात लगने लगी है।

पिछले सालभर में मन की बात पर लोगों के रिएक्शन

Month / Likes / Dislikes

February 2021 : 17k / 51k

January 2021 : 32k / 64k

December 2020 : 35k / 46k

November 2020 : 12k / 29k

October 2020 : 14k / 9.5k

September 2020 : 37k / 67k

August 2020 : 462k / 1.3m

July 2020 : 11k / 16k

June 2020 : 13k / 16k

May 2020 : 6.3k / 6.9k

April 2020 : 5.2k / 2.8k

March 2020 : 10k / 4.2k

छात्रों, युवाओं, बेरोजगारों और नौकरीपेशाओं का गुस्सा है ये

सरकार से नाराज और परेशान लोगों की नाराजगी मीडिया ने दिखाना बंद कर दिया है। ऐसे में लोगों ने अपनी नाराजगी दिखाने का जरिया सोशल मीडिया पर ढूंढा है। पिछले सालभर के आंकड़ों में जो नजर आता है वो देश के छात्रों, युवाओं, बेरोजगारों और नौकरीपेशाओं का गुस्सा है। कोरोना और लाॅकडाउन काल में सरकार और प्रधानमंत्री को नौकरीपेशाओं का गुस्सा झेलना पड़ा जिन्होंने अपनी नौकरियां खोई। साथ ही जिनके व्यापार ठप हुए उनके गुस्से का भी शिकार सरकार को होना पड़ा।

वहीं इसके बाद अगस्त में सरकार को उन स्कूली छात्रों का गुस्सा झेलना पड़ा जो आईआईटी या नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। सरकार ने कोरोना जब पीक पर था उस दौर में ये परीक्षाएं करवाई। इससे छात्रों में नाराजगी थी। सरकार पर आरोप लगा था कि कोचिंग संस्थानों के दबाव में सरकार ने वो परीक्षाएं कराई थी।

इसी तरह नवम्बर और दिसम्बर में किसान आंदोलन और महंगाई के चलते लोगों ने नरेंद्र मोदी की मन की बात को नकारा। दिसम्बर में Petrol-diesel के दामों में बढ़ोतरी होना शुरू हुई थी। इसके चलते महंगाई को लेकर भी लोगों में गुस्सा था।

जनवरी और फरवरी में कमर तोड़ती महंगाई, केंद्रीय बजट, प्राइवेटाइजेशन, बैंकों के मर्जर जैसे निर्णयों से पनपे गुस्से का शिकार सरकार हुई। बजट में प्राइवेटाइजेशन कर कई सरकारी संस्थानों को बेचने की घोषणा हुई जिसके चलते नौकरीपेशा और बैंककर्मियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। लम्बे समय से बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे लोगों ने भी फरवरी में सरकार पर अपना गुस्सा निकाला।

पिछले दिनों युवाओं और बेरोजगारों ने ट्विटर पर #मोदी_रोजगार_दो भी ट्रैंड कराया था। लाखों लोगों ने #MODI_ROJGAR_DO को ट्वीट किया था। एक के बाद एक आंदोलन, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, व्यापार ठप होने जैसी समस्याएं पैदा होने और उनका कोई निदान नहीं होेने के चलते सड़क, मोहल्लों, चौराहों, घरों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारतीय राजनीति में या केंद्र की सत्ता में यह बदलाव का संकेत तो नहीं !!!!

(नरेंद्र मोदी और बीजेपी के यू-ट्यूब चैनल्स पर अधिकतम देखे गए व्यूज के आंकड़ों के आधार पर लाइक्स और डिसलाइक्स को कैलकुलेट किया गया है।)