सुरभि जैन

रामलीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत जैसी फिल्मों के निर्देशक संजय लीला भंसाली एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है उनकी आने वाली फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जिसका टीजर हाल ही में रिलीज किया गया। फिल्म में गंगूबाई की भूमिका एक्ट्रेस आलिया भट्ट निभा रही हैं। भंसाली के जन्मदिन पर रिलीज टीजर में आलिया की जबरदस्त एक्टिंग की तारीफ की जा रही है। वहीं ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के नाम की भी चर्चा तेज हो गई।

कई लोग जानना चाहते हैं कि आखिर कौन हैं ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’, जिसपर भंसाली फिल्म बना रहे हैं। फिल्म का ऑफिशियल टीज़र 24 फरवरी 2021 को रिलीज़ हुआ है, फिल्म 30 जुलाई 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आपको बता रहे हैं कि आखिर कौन है गंगूबाई और क्या है उनके जीवन की कहानी। गंगूबाई काठियावाड़ी एक किताब ‘माफिया क़्वीन इन मुंबई’ पर बेस्ड स्टोरी है, जिसे ‘एस हुसैन’ ने लिखा है, और इसी किताब में बताया गया है गंगूबाई काठियावाड़ी के बारे में।

मुंबई आकर बॉलीवुड पर राज करना चाहती थी गंगूबाई

16 साल की गंगूबाई जिसका पूरा नाम ‘गंगा हरजीवन दास’ काठियावाड़ी था जो गुजरात के ‘काठियावाड़’ के एक रसूखदार परिवार से संबंध रखती थी‌। परिवार वाले बड़े इज़्ज़त पसंद लोग थे और गंगा को पढा़ना लिखाना चाहते थे लेकिन गंगा के मन में बॉलीवुड रच बस गया था। वह पढ़ना लिखना नहीं चाहती थी बल्कि हीरोइन बन बॉलीवुड पर राज करना चाहती थी जिसके लिए उसे मुंबई जाना था।

लाल बिंदी लगाने वाली गंगू जिसने प्यार में धोखा खाया और मात्र ₹500 में बेच दी गई

किताब के अनुसार गंगा को अपने पिता के लिए काम करने वाले अकाउंटेंट लड़के रमणीक से प्यार हो गया था। जब उसे पता चला कि रमणीक मुंबई में रह चुका है तो उसे रमणीक के जरिए मुंबई जाने का एक सुनहरा मौका दिखाई दिया। जिसके चलते उसने रमणीक से दोस्ती की और यह दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई। जिसके बाद दोनों ने भागकर शादी कर ली और मुंबई आ गए, जहां रमणीक ने गंगा को अपनी मौसी को सौंप दिया जिसने उसे मुंबई के रेड लाइट एरिया ‘कमाठीपुरा’ ले जाकर मात्र ₹500 में बेच वेश्यावृत्ति में धकेल दिया।

डॉन करीम लाला को बनाया भाई तब से गंगूबाई कोठेवाली से गंगूबाई काठियावाड़ी बन गई

कमाठीपुरा में आने के बाद गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी गंगू बन चुकी थी, जहां एक दिन शौकत खान नाम का पठान आया जिसने गंगू के साथ बड़ी ही बदसलूकी का व्यवहार किया। उसे बेरहमी से नोचा घसीटा और बिना पैसे दिए चला गया। ऐसा एक बार फिर हुआ, इस बार गंगू की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। जब गंगू को पता चला कि यह पठान डॉन करीम लाला के लिए काम करता है तो एक दिन वह डॉन के घर के बाहर चली गई। तब करीम लाला ने गंगूबाई से बात की और उसे आश्वासन दिया कि अब उसके साथ ऐसा कभी नहीं होगा। इस बात पर गंगूबाई ने करीम लाला के हाथ पर एक धागा बांध दिया और उसे अपना राखी भाई बना लिया।

रेड लाइट एरिया की महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रधानमंत्री तक पहुंच गई

जब लोगों को पता चला कि गंगूबाई डॉन की राखी बहन है तो कमाठीपुरा में गंगू की धाक जम गयी, आस-पास के इलाकों में गंगू का दबदबा हो गया और अब गंगू, गंगू कोठेवाली से गंगूबाई काठियावाड़ी के नाम से मशहूर हो गयी थी। गंगू के बारे में कहा जाता है कि वह कभी भी किसी लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ वेश्यावृत्ति में नहीं धकेलती थी और जो इस काम को छोड़ना चाहते थे कि उसे जाने देती थी। वे मुंबई के हीरामंडी नाम की जगह पर कोठा चलाती थीं। साथ ही देश के कई शहरों में फ्रेंचाइजी कोठे खोलने वाली पहली महिला थीं। गंगू ने मुंबई के रेड लाईट एरिया में काम करने वाली महिलाओं के अधिकारों के लिए खूब काम किया और इसके लिए वह प्रधानमंत्री तक पहुंच गई।