सुरभि जैन

जलवायु कार्यकर्ता 22 वर्षीय दिशा रवि को मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत ने टूलकिट मामले में ज़मानत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने किसान आंदोलन को लेकर शेयर किए गए टूलकिट मामले में गिरफ्तार कर रिमांड पर रखा था। पुलिस का आरोप है कि टूलकिट मामला खालिस्तानी ग्रुप को दोबारा खड़ा करने और भारत सरकार के खिलाफ एक बड़ी साजिश है। क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर सवाल भी खड़े किए गए थे। बार-बार इसे खालिस्तानी आंदोलन से जोड़कर भी देखा जा रहा था। यह मामला आने के बाद अक्सर हमने खबरों में कई नए शब्द और बातें सुनीं। ऐसे में आपको बता रहे हैं टूलकिट और दिशा रवि की गिरफ्तारी से जुड़े हुए कुछ शब्द जो पहली बार सुने और ट्विटर पर ट्रेंड पर रहे…

1. खालिस्तान… इसकी मांग ने देश पर कई कलंक लगाए, सैकड़ों लोगों की जान चली गई

1947 में अंग्रेज भारत को दो देशों में बांटने की योजना बना रहे थे, तभी कुछ सिख नेताओं ने अपने लिए अलग देश खालिस्तान की मांग की। उन्हें लगा कि अपने अलग मुल्क की मांग करने के लिए ये सबसे उपयुक्त समय है। आजादी के बाद इसे लेकर हिंसक आंदोलन चला, जिसमें कई लोगों की जान भी गई। 1980 के दौरान अकाली दल के उदय और भाषा के आधार पर पंजाब राज्य के गठन के बाद खालिस्तान के तौर पर स्वायत्त राज्य की मांग 1980 के दशक में काफी बढ़ गई। इसे खालिस्तान आंदोलन का नाम दिया गया। अकाली दल के कमजोर पड़ने और जरनैल सिंह भिंडरावाला की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही ये आंदोलन हिंसक होता गया। भिंडरावाला सिख धर्म में कट्टरता का समर्थक था, पंजाब पर बढ़ती उसकी पकड़ के साथ ही अराजकता का दौर शुरू हुआ। इसके बाद साल 1980-1984 के बीच पंजाब में आतंकी हिंसाएं बढ़ गईं। 1983 में डीआईजी अटवाल की स्वर्णमंदिर परिसर में ही हत्या कर दी गई और भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया।

तब तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने भिंडरवाला को स्वर्ण मंदिर से निकालने की तैयारी की और फिर इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को अंजाम दिया। स्वर्ण मंदिर के अंदर 6 जून 1984 को भारी गोलीबारी के बाद जरनैल सिंह भिंडरवाला का शव बरामद कर लिया गया। जिसके बाद सिख समुदाय में भारी रोष फैल गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने कर दी। खालिस्तान आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ, इसके बाद भी सिख समुदाय में उथल-पुथल चलती रही और बीच-बीच में खालिस्तान की मांग भी उठती रही। इसी के चलते जून 1985 को एक सिख राष्ट्रवादी ने एयर इंडिया के विमान में विस्फोट किया जिसमें 329 लोगों की मौत हो गई। दोषी ने इसे भिंडरवाला की मौत का बदला बताया‌। इसके बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं जहां कभी ऑपरेशन ब्लूस्टार से जुड़े लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया तो कभी आम आदमी को आतंक का सामना करना पड़ा और आज फिर पिछले कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन को भी उसी खालिस्तान आंदोलन का बदला हुआ रूप कहा जा रहा है।

2. आखिर क्या है ये टूलकिट?

“टूलकिट” किसी भी मुद्दे को समझाने के लिए बनाया गया एक गूगल डॉक्यूमेंट होता है। यह इस बात की जानकारी देता है कि किसी समस्या के समाधान के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए? यानी इसमें एक्शन प्वाइंट्स दर्ज होते हैं, इसे ही टूलकिट कहते हैं। इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया पर कैम्पेन स्ट्रेटजी के अलावा वास्तविक रूप में सामूहिक प्रदर्शन या आंदोलन करने से जुड़ी जानकारी देने के लिए किया जाता है। इसमें किसी भी मुद्दे पर दर्ज याचिकाओं, विरोध-प्रदर्शन और जनांदोलनों के बारे में जानकारियां शामिल हो सकती हैं। हाल फिलहाल में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जो भी आंदोलन हो रहे हैं, चाहे वो ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ हो या अमेरिका का ‘एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट’ या फिर दुनियाभर में ‘क्लाइमेट स्ट्राइक कैंपेन’ हो, सभी मामलों में आंदोलनों से जुड़े लोग टूलकिट के जरिए ही ‘एक्शन पॉइंट्स’ तैयार करते हैं, और आंदोलनों को आगे बढ़ाते हैं।

3. क्लाइमेट एक्टिविस्ट

जलवायु कार्यकर्ता या क्लाइमेट एक्टिविस्ट जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से संबंधित सक्रियता में लगे गैर सरकारी संगठनों का समूह है। पर्यावरण आंदोलनों में से एक क्लाइमेट मूवमेंट 21वीं सदी के पहले दशकों में तेजी से बढ़ा। 1990 के दशक में जब यूएनएफसीसीसी में क्लाइमेट चेंज को लेकर चर्चा की गई तब से क्लाइमेट मुवमेंट ने जोर पकड़ा। जलवायु पर वैश्विक समझौते के लिए 12 दिसंबर को कोपेनहेगन में 40,000 से 100,000 लोगों ने मार्च में भाग लिया इसके बाद दुनिया भर में एक साथ 5,400 से अधिक रैलियां और प्रदर्शन हुए। इसी तरह के जलवायु आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले या जलवायु परिवर्तन को एक मुद्दा बनाकर लड़ने वाले लोगों को क्लाइमेट एक्टिविस्ट का नाम दिया गया।

4. UAPA क्या है

Unlawful activities prevention act (UAPA) कानून 1967 में संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत दी गई बुनियादी आजादी पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के लिए लाया गया था। 2019 में इसमें संशोधन किया गया, जिसके बाद संस्थाओं ही नहीं, व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इतना ही नहीं किसी पर शक होने से ही उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। अब तक सिर्फ संगठनों को ही आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सकता था। खास बात ये है कि इसके लिए उस व्यक्ति का किसी आतंकी संगठन से संबंध दिखाना भी जरूरी नहीं है। आतंकी का टैग हटवाने के लिए भी कोर्ट के बजाय सरकार की बनाई रिव्यू कमेटी के पास जाना होता है, बाद में कोर्ट में अपील की जा सकती है।

 5. ‘ट्रांजिट रिमांड’

पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है तो उसे गिरफ्तारी के समय से 24 घंटे के अन्दर अदालत में पेश करना होता है। यह प्रावधान सीआरपीसी की धारा 57 और धारा 76 में है, लेकिन जब ऐसी परिस्थितियां हो कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, वह किसी दूसरे प्रदेश या ज़िले में है, जहां से उसे 24 घंटे के अन्दर गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाली कोर्ट में पेश करना संभव नही है, ऐसी स्थिति में पुलिस उस गिरफ्तार व्यक्ति को जिस ज़िले में गिरफ्तार किया है, वहां की नजदीकी अदालत में पेश करती है। तब कोर्ट आरोपी को रिमांड पर लेकर उसे पुलिस की हिरासत में भेज देती है। इसी रिमांड को ही ‘ट्रांजिट रिमांड’ कहते हैं।

6. ट्रांजिट जमानत या‌ बेल

ट्रांजिट जमानत यानी ऐसी जमानत जो निर्धारित समय व निर्धारित उद्देश्य के लिए ली जाती है। इसके लिए अदालत को जमानत का समय और इस बीच क्या कार्य किया जाना है, इसकी वजह व इसका उचित कारण बताना होता है। अदालत मामले को सुनने के बाद इस तरह की जमानत देने का अधिकार रखती है। ऐसी जमानत विशेष मामलों में ही मिलती है। खासतौर पर जब जमानत के लिए आवेदन करने वाला या वाली के खिलाफ दूसरे राज्य में मुकदमा दर्ज हो तो वह अपना पक्ष दूसरे राज्य में रखने के लिए ट्रांजिट जमानत की मांग कर सकते हैं।